Ichha Kharkai Dam Protest (प्रकाश कुमार गुप्ता) : ईचा-खरकई बांध परियोजना के विरोध में किए गए वीर शहीद नायब सूबेदार गंगाराम कालुंडिया के संघर्ष को आज भी विस्थापितों और समाज में याद किया जाता है। उनके 43 वें शहादत दिवस के अवसर पर ईचा खरकई बांध विरोधी संघ, कोल्हान ने इलिगाड़ा में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया, जिसमें गंगाराम कालुंडिया के शौर्य और बलिदान को सम्मानित किया गया।
गंगाराम कालुंडिया ने 1980 के दशक में स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना (ईचा डैम) के खिलाफ बगावत की आवाज उठाई थी। वह वॉलेंटियर सेवानिवृत होने के बाद इस परियोजना के कारण प्रभावित 87 गांवों और विस्थापितों की आवाज बने। उनके नेतृत्व में कोल्हान क्षेत्र के ग्रामीणों ने संघर्ष किया, जब तक कि उड़ीसा और बिहार पुलिस प्रशासन ने 4 अप्रैल 1982 को छल और धोखे से उनकी शहादत नहीं ले ली। उनके शहीद होने के बाद से, हर साल श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाती रही है, जो उनकी शहादत और बलिदान को याद करती है।
श्रद्धांजलि सभा में संघ के अध्यक्ष बिर सिंह बिरुली ने कहा कि शहीद गंगाराम कालुंडिया के संघर्ष ने हमें हमेशा प्रेरित किया है। उनका बलिदान हमें और मजबूत बनाता है, और हमारी लड़ाई अब और तेज हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ अब जनांदोलन के साथ-साथ कानूनी लड़ाई भी चरणबद्ध तरीके से लड़ा रहा है, ताकि विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

इस श्रद्धांजलि सभा में साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली, साधो पूर्ति, बीर सिंह बिरुली, रेयांश समड, सुरेश सोय, श्याम कुदादा, रविंद्र अल्डा, गणेश बारी, सुरेंद्र बुडउली, दशकन कुदादा, प्रेम मार्डी, कुमार चंद्र मार्डी, हरीश चंद्र अल्डा, गुलिया कुदादा, मुकेश कालुंडिया, सोमा बुड़ीउलि, डोबरो देवगम, साधु बनरा, संजय सरील देवगम, प्रबल महतो, सुरेश महतो, छोटा पूर्ति, शेट्टी पूर्ति, असई कालुंडिया, मोती सुंडी, अजय अल्डा, सतारी अल्डा, मोटकी अल्डा, शशि तिर्की सहित कई आंदोलनकारी और ग्रामीण उपस्थित थे।
इस आयोजन ने न केवल गंगाराम कालुंडिया के संघर्ष को याद किया, बल्कि उनके द्वारा शुरू किए गए आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया। उनकी शहादत और संघर्ष आज भी विस्थापितों और उनके अधिकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।