Salukdih Cultural Program : प्रखंड क्षेत्र के सालुकडीह गांव में स्थानीय ग्रामीणों और आयोजन समिति के सहयोग से एक दिवसीय भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। देर रात तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और कार्यक्रम का आनंद लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोकगीतों के साथ हुई। इस दौरान उड़ीसा के प्रसिद्ध झूमर कलाकार दीपक महतो और सुलोचना महतो के झूमर दल ने अपनी शानदार प्रस्तुति से लोगों का दिल जीत लिया। कलाकारों ने बांग्ला, उड़िया, नागपुरी और कुरमाली भाषाओं के लोकगीतों पर आकर्षक झूमर नृत्य प्रस्तुत किया। कलाकारों के मधुर गीत और लयबद्ध नृत्य को देखने के लिए दर्शक काफी उत्साहित नजर आए। जैसे ही मंच पर झूमर नृत्य की प्रस्तुति शुरू हुई, दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी और लोग देर तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।
कलाकारों के मनमोहक नृत्य और लोकगीतों ने ऐसा माहौल बना दिया कि दर्शक भी खुद को झूमने से रोक नहीं सके। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने अपने प्रदर्शन से स्थानीय संस्कृति और लोक परंपरा की झलक पेश की, जिससे कार्यक्रम में उत्साह और भी बढ़ गया।
रात्रि के समय कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पश्चिम बंगाल के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत मानभूम छऊ नृत्य रहा। छऊ नृत्य की प्रस्तुति ने पूरे कार्यक्रम को और भी रोमांचक बना दिया। बंगाल की बामू छऊ नृत्य पार्टी के उस्ताद शशोधर कालिंदी तथा आदवाना तरुण छऊ नृत्य पार्टी के उस्ताद पद्मश्री नेपाल महतो के नेतृत्व में कलाकारों ने पूरी रात छऊ नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति दी।
छऊ नृत्य के माध्यम से कलाकारों ने रामायण और महाभारत की कथाओं पर आधारित देव और दानवों की रोचक झांकियां प्रस्तुत कीं। इसमें विशेष रूप से गणेश वंदना, महिषासुर वध तथा अन्य पौराणिक प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों की वेशभूषा, मुखौटे और युद्ध शैली की नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छऊ नृत्य के दौरान कलाकारों की ऊर्जा और तालमेल देखने लायक था, जिसे देखकर दर्शक देर रात तक कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे।
इस अवसर पर समाजसेवी खगेन महतो सहित आयोजन समिति के कई सदस्य मौजूद थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजकों ने बताया कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में लोक संस्कृति और पारंपरिक कला को जीवित रखना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर ग्रामीणों ने आयोजन समिति और कलाकारों की सराहना की तथा भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों को जारी रखने की उम्मीद जताई। पूरे आयोजन के दौरान गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा और देर रात तक तालियों की गूंज सुनाई देती रही।



