दक्षिण पूर्व रेलवे के लोको पायलटों को आपदा प्रबंधन के लिए किया गया प्रशिक्षित
Train Disaster Management Training (प्रकाश कुमार गुप्ता) : टाटानगर रेल सिविल डिफेंस द्वारा इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों को ट्रेन में आग लगने पर सुरक्षात्मक कार्यों और आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण शिविर में सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने उपस्थित लोको पायलट दल को आग लगने पर सही तरीके से कार्य करने के महत्वपूर्ण उपायों और दायित्वों के बारे में विस्तार से बताया।
संतोष कुमार ने ट्रेन में आग लगने की स्थिति में तत्काल करने योग्य कदमों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जब ट्रेन में आग लगे, तो सबसे पहले रेल इंजन की फ्रेशर लाइट जलानी चाहिए और इंजन को सुरक्षित स्थान पर खड़ा करना चाहिए। साथ ही, उन्हें यह भी निर्देश दिया कि आग लगने वाली कोच को दोनों तरफ से कम से कम 45 मीटर की दूरी पर अलग कर देना चाहिए ताकि आग के फैलने का खतरा कम हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि यात्री को सुरक्षित स्थान पर निकालने का प्रबंध करना, स्टेशन मास्टर को जानकारी देना और गाड़ी को रोल होने से बचाने के लिए प्रोटेक्शन उपायों को लागू करना आवश्यक है। यदि मालवाहन ट्रेन हो, तो वैगन लेवल सील करने और माल को सुरक्षित करने के प्रयास भी किए जाने चाहिए। इसके अतिरिक्त, छोटी आग को बुझाने के लिए उपलब्ध साधनों जैसे पानी, मिट्टी, बालू आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है।
संतोष कुमार ने यह भी बताया कि आपदा की स्थिति में ट्रेन के विभिन्न स्थानों जैसे रेल इंजन, ब्रेक वेन, ऐसी कोच, पैंट्री कार, और जनरेटर कार में विशेष रूप से फायर संयंत्र लगाए जाते हैं। ये संयंत्र फायर सुरक्षा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होते हैं और इनका सही उपयोग करके सुरक्षात्मक कार्य किए जा सकते हैं।

इस प्रशिक्षण शिविर में दक्षिण पूर्व रेलवे के विभिन्न मंडलों जैसे रॉची, आद्रा, चक्रधरपुर, खड़गपुर, संतरागाछी, मालदा और कलकत्ता ईस्टर्न रेलवे से लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों ने भाग लिया। शिविर में भाग लेने वाले सभी पायलटों ने इस प्रशिक्षण से काफी लाभ उठाया और आपदा प्रबंधन के लिए अपनी तैयारी को और सुदृढ़ किया।
सिविल डिफेंस डेमोंस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह ने भी प्रशिक्षण में भाग लिया और उन्होंने एलपीजी गैस लिकेज की आग को बुझाने के तरीकों पर विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया। इसके अलावा, डेमोंस्ट्रेटर शंकर प्रसाद ने डीसीपीटी फायर संयंत्र और CO2 फायर संयंत्र के प्रयोग की विधि और उनसे जुड़ी सावधानियों को स्पष्ट किया। इस तरह के प्रशिक्षण से लोको पायलटों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी तरीके से कार्य करने में मदद मिलेगी, जो रेल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस आयोजन ने लोको पायलटों को आपदा प्रबंधन की गंभीरता और ट्रेन संचालन के दौरान संभावित खतरों से निपटने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों से अवगत कराया। ऐसे प्रशिक्षण शिविर भविष्य में और अधिक नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा और रेल यात्रा की सुरक्षितता सुनिश्चित की जा सके।