Chandil Dam Displaced Families : चांडिल अनुमंडल कार्यालय सभागार में मंगलवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्पेशल रैपोर्टियर सुचित्रा सिन्हा ने चांडिल डेम के विस्थापित परिवारों के साथ वार्ता के लिए बैठक किया।बैठक में एसडीएम विकास राय,एडी रविन्द्र नाथ गगराई,बीडीओ तालेश्वर रविदास,सीओ प्रदीप कुमार महतो, चांडिल डेम के कई गावों के विस्थापित,स्वर्णरेखा बांध प्रमंडल चांडिल के कार्यपालक अभियंता,पुनर्वास पदाधिकारी,पेयजल एवं स्वाच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता,टाटा कंपनी के सीएसआर प्रतिनिधि एवं ग्राम पंचायत के मुखिया शामिल हुए।बैठक में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्पेशल रैपोर्टियर सुचित्रा सिन्हा ने विस्थापित की समस्याओं को बारीकी से सुना।इस दौरान विभिन्न गावों से आए चांडिल डेम के विस्थापितों ने अपना अपना समस्या को रखा।जिसमें विस्थापितों ने बताया कि चांडिल डेम निर्माण के दौरान विभिन्न प्रलोभन देकर जमीन को अधिग्रहण किया गया।जमीन अधिग्रहण के समय जो विस्थापितों को प्रलोभन दिया गया वह आज भी पुरा नहीं हुआ है।जो विस्थापितों को पुनर्वास स्थल मिला है उसमें मूलभूत सुविधा नहीं है।अभी भी विस्थापितों को अपने अधिकार के लिए सभी कार्यालयों में दर दर भटकना पड़ता है।तीन वर्ष से पुनर्वास स्थल पर विस्थापितों को जमीन नहीं मिल रहा है।पुनर्वास स्थल पर पानी बिजली स्वास्थ्य की सुविधा नहीं है।कुकड़ू पुनर्वास स्थल में जिला परिषद के द्वारा सामुदायिक भवन को सीमेंट का गोदाम बना के रखा है।चिलगु पुनर्वास स्थल के श्मशानघाट को बिचौलिया द्वारा बेच दिया गया है।ईचागढ़ केे सोड़ो पंचायत के कई गांव में लोगों का अबतक विकास पुस्तिका नहीं बना है।लोगों का 90 प्रतिशत जमीन पानी में डुबा हुआ है।विकास पुस्तिका में नये सदस्यों का नाम जोड़ने की मांग रखा गया।जिससे जाति आवासीय प्रमाणपत्र बनाने में विस्थापित परिवारों को दिक्कत न हो।विस्थापित साबिर अंसारी ने बताया कि चांडिल के पुनर्वास स्थल कपाली ए एवं बी ब्लाक पूरी तरह से अवैध कब्जा में है।कपाली के दोनों पुनर्वास स्थल पर बंगालादेशी घुसपैठी बैठकर भर गया है।जिससे खाली कराने की मांग किया।विस्थापितों ने कहा कि चांडिल बहुउद्देशीय परियोजना के अंतर्गत पालना जलाशय सिंचाई के लिए निर्माण कराया गया है।जहां लोगो की जमीन सिंचाई के लिए सुविधा हो।पालना जलाशय के जल को स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के द्वारा नरसिंह इस्पात लिमिटेड को दिया जाता है।जिससे जांच कर कार्रवाई करने की मांग किया है।विस्थापित ने बताया कि नरसिंह लिमिटेड में काम करने के दौरान विस्थापित युवक चंपई मांझी का पैर पूरी तरह कट गया है।उसे समुचित इलाज का खर्च एवं उचित मुआवजा देने की मांग किया गया।
Chandil Dam Displaced Families : 3 साल से जमीन नहीं, सुविधाएं गायब, मानवाधिकार आयोग के सामने खुली पोल

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