हाता : दुर्गापूजा के शुभ अवसर पर माताजी आश्रम, हाता में बहुभाषी कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 11 अक्टूबर को झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद के 23वें वार्षिक उत्सव के तहत हुआ। इस दौरान साहित्य, संस्कृति और सम्मान से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
परिषद के वार्षिक उत्सव में कई कार्यक्रम
झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद ने अपना 23वां वार्षिक उत्सव धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर ‘झारखंड प्रभा’ के 18वें अंक का विमोचन किया गया। इसके अलावा, गुणीजनों को सम्मानित किया गया। साहित्यिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कार दिए गए।
इसी क्रम में बहुभाषी कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे आयोजन कम देखने को मिलते हैं। हालांकि, परिषद इस साहित्यिक परंपरा को लगातार जीवित रखे हुए है।
चंदन टीका और कलम देकर कवियों का सम्मान
कवि सम्मेलन दोपहर दो बजे शुरू हुआ। कार्यक्रम से पहले सभी कवियों और कवयित्रियों का सम्मान किया गया। उन्हें चंदन का टीका लगाया गया। साथ ही, उपहार स्वरूप कलम भेंट की गई।
इस सम्मेलन में बांग्ला, हिंदी, अंग्रेजी और ओड़िया भाषाओं के कवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। वहीं, राजकुमार साहू ने सभी कवियों का स्वागत किया।
सुनील कुमार दे ने बांग्ला कविता से की शुरुआत
अंचल के जाने-माने बांग्ला और हिंदी कवि सुनील कुमार दे ने सम्मेलन की शुरुआत की। उन्होंने अपनी बांग्ला कविता ‘आनंदमयी मां जे आमार’ प्रस्तुत की। कविता के माध्यम से उन्होंने आनंद और शुभ शक्तियों की विजय का संदेश दिया।
इसके बाद प्रतिदिन के कवि करुणामय मंडल ने अपनी कविता ‘छात्रों में भी पक्षपात’ सुनाई। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पक्षपात के मुद्दे को उठाया। साथ ही, दोहरे मापदंडों पर सवाल खड़े किए।

कवियों ने सामाजिक मुद्दों पर सुनाईं रचनाएं
घाटशिला के वीरेंद्र नाथ घोष ने अपनी हिंदी कविता ‘कुत्ता’ प्रस्तुत की। उनकी रचना में युधिष्ठिर और स्वर्ग से जुड़ा प्रसंग शामिल था।
वहीं, मुसाबनी के कवि सुबोध सिंह सरदार ने बांग्ला कविता ‘शितेर कम्बल’ सुनाई। इसके बाद नुआग्राम के शंकर चंद्र गोप ने ‘आज भारत अशांत क्यों’ शीर्षक से अपनी हिंदी कविता प्रस्तुत की। उनकी रचना में देश की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख था।
इसके अलावा, युवा कवि विकास कुमार भक्त ने अंग्रेजी कविता ‘Keep Your Hope Alive’ सुनाई। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से आगे बढ़ते रहने और जीत की उम्मीद बनाए रखने का संदेश दिया।
महिला कवयित्री ने अपनी रचना से रखे विचार
राखा की कवयित्री वीथिका मंडल ने बांग्ला कविता ‘आमी की कोरि’ प्रस्तुत की। उनकी रचना में महिला के विभिन्न रूपों को दर्शाया गया। उन्होंने महिला को गृहिणी, विज्ञान की शिक्षिका, लेखिका, गायिका, मां और मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत किया।
इसी क्रम में पुतलुपुंग के वरिष्ठ कवि आशुतोष मंडल ने अपनी बांग्ला कविता ‘बैशाख’ सुनाई। उनकी कविता में बैशाख महीने की शुरुआत, पूजा-पाठ और पारिवारिक परंपराओं का चित्रण किया गया।
युवा और वरिष्ठ कवियों ने बांधा समां
टांगराइन के युवा कवि उज्ज्वल मंडल ने अपनी कविता में मध्य विद्यालय टांगराइन के माहौल का उल्लेख किया। वहीं, परसुडीह के वरिष्ठ कवि भवतारण मंडल ने बांग्ला कविता ‘पुराण समय नूतन जीवन’ प्रस्तुत की। उनकी रचना में पुराने समय की स्मृतियों और इतिहास का वर्णन था।
इसके अलावा, जाम्बानी की युवा कवयित्री ने हिंदी कविता ‘आओ हम इंसान बने’ सुनाई। उनकी कविता की पंक्तियों ने मानवता और एकता का संदेश दिया:
“आओ मिलकर साथ चलें,
अच्छे उद्देश्य की ओर बढ़ें।
मानवता की पहचान बुनें,
आओ हम इंसान बनें।”
संथाली, ओड़िया और बांग्ला कविताओं की भी प्रस्तुति
सम्मेलन में प्रसिद्ध कवि सूर्य सिंह बेसरा ने संथाली भाषा में कविता सुनाई। वहीं, पंकज कुमार मिश्रा ने ओड़िया में अपनी रचना प्रस्तुत की। घाटशिला के साधु चरण पाल ने भी बांग्ला कविता सुनाकर श्रोताओं को साहित्यिक रंग में सराबोर किया।
इस तरह, विभिन्न भाषाओं की कविताओं ने कार्यक्रम को बहुभाषी स्वरूप प्रदान किया। कवियों की प्रस्तुतियों के माध्यम से साहित्य और संस्कृति की विविधता देखने को मिली।
सुदीप मुखर्जी ने किया संचालन
कवि सम्मेलन का कुशल संचालन सुदीप मुखर्जी ने किया। अंत में कृष्ण पद मंडल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकार, साहित्य प्रेमी और परिषद के सदस्य उपस्थित रहे।
इस आयोजन के माध्यम से झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद ने क्षेत्र में साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया। साथ ही, बहुभाषी कविता के जरिए आपसी सद्भाव, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।




