जमशेदपुर : Jamshedpur Minor Driving Fine को लेकर अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने देने पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत अभिभावक या वाहन मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। कानून में ₹25,000 तक के जुर्माने और तीन साल तक की कैद का प्रावधान है। इसके अलावा, संबंधित वाहन के पंजीकरण पर भी कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की उम्र और ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी नियमों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
Jamshedpur Minor Driving Fine: नाबालिग को वाहन देने पर क्या है कानून?
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 199A में नाबालिगों द्वारा किए गए मोटर वाहन संबंधी अपराधों के लिए अभिभावक या वाहन मालिक की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। इस प्रावधान के तहत, संबंधित मामले में दोषी ठहराए जाने पर अभिभावक या वाहन मालिक को तीन साल तक की कैद और ₹25,000 का जुर्माना हो सकता है।
कानून में कुछ अपवाद भी दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, निर्धारित शर्तों के अनुसार वैध लाइसेंस प्राप्त कर संबंधित श्रेणी का वाहन चलाने वाले किशोर पर यह प्रावधान उसी तरह लागू नहीं होता। अभिभावक या वाहन मालिक के लिए कानून में कुछ बचाव के प्रावधान भी मौजूद हैं।
कानून के तहत नाबालिग द्वारा अपराध किए जाने पर इस्तेमाल किए गए वाहन का पंजीकरण 12 महीने के लिए रद्द करने का भी प्रावधान है। इसलिए यह मामला केवल जुर्माने तक सीमित नहीं है।
आधिकारिक कानूनी जानकारी के लिए भारत सरकार के India Code पोर्टल पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A देखी जा सकती है।
जमशेदपुर में यातायात पुलिस की जागरूकता पहल
जमशेदपुर में नाबालिगों के वाहन चलाने को लेकर यातायात पुलिस द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जाने की खबरें सामने आई थीं। सितंबर 2026 में प्रकाशित स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने स्कूलों के आसपास अभिभावकों को बच्चों को बाइक या अन्य वाहन नहीं देने की सलाह दी थी। स्कूल वैन चालकों की जांच और यातायात नियमों के पालन को लेकर भी जागरूक किया गया था।
इस तरह की पहल का उद्देश्य नाबालिगों के वाहन चलाने से जुड़े जोखिमों को कम करना और सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाना है। हालांकि, किसी नए या विशेष स्थानीय अभियान की वर्तमान स्थिति की पुष्टि संबंधित यातायात पुलिस के आधिकारिक बयान से की जानी चाहिए।
अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
नाबालिग बच्चों को बिना उचित कानूनी पात्रता और वैध ड्राइविंग लाइसेंस के मोटर वाहन चलाने देना उनके साथ-साथ सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है। अभिभावकों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- बच्चों को निर्धारित कानूनी उम्र से पहले वाहन चलाने की अनुमति न दें।
- वाहन की चाबी बच्चों की पहुंच से दूर रखें, खासकर जब वे वाहन चलाने के लिए कानूनी रूप से पात्र न हों।
- बच्चों को हेलमेट, सीट बेल्ट, गति सीमा और यातायात संकेतों के महत्व के बारे में समझाएं।
- स्कूल जाने के लिए नाबालिगों को स्वयं बाइक या स्कूटर चलाकर जाने की अनुमति न दें, जब तक वे संबंधित वाहन चलाने के लिए कानूनी रूप से पात्र न हों।
- वाहन चलाने से पहले लाइसेंस और वाहन के दस्तावेजों की वैधता सुनिश्चित करें।
सड़क सुरक्षा के लिए नियमों का पालन जरूरी
नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकता है। कम उम्र में सड़क पर वाहन चलाने का अनुभव और यातायात परिस्थितियों को समझने की क्षमता पर्याप्त न होने से दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।
अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करें और उन्हें सुरक्षित परिवहन के विकल्प उपलब्ध कराएं। वहीं, वाहन चालकों को भी गति सीमा का पालन करना चाहिए और सड़क पर पैदल चलने वालों तथा अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।
निष्कर्ष: जमशेदपुर में नाबालिगों के वाहन चलाने के मामले में अभिभावकों को मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी रखना जरूरी है। धारा 199A के तहत कानूनी कार्रवाई में ₹25,000 का जुर्माना और तीन साल तक की कैद शामिल हो सकती है। किसी विशिष्ट स्थानीय कार्रवाई या अभियान की पुष्टि के लिए यातायात पुलिस की आधिकारिक सूचना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।



