Hemant Soren मंगलवार को अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन के निधन के बाद पारिवारिक और संताली आदिवासी परंपराओं का निर्वहन करने के लिए सपरिवार चांडिल के धातकीडीह (कंगलाटांड़) स्थित ननिहाल पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार के सदस्यों के साथ पारंपरिक रस्में निभाईं। उनके साथ पत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन, पुत्र और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे। सोरेन परिवार की बड़ी बहू एवं भाजपा नेत्री सीता सोरेन भी अपनी बेटी के साथ कार्यक्रम में शामिल हुईं।

Hemant Soren का संताली परंपरा के तहत ननिहाल आगमन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को दोपहर करीब ढाई बजे सड़क मार्ग से चांडिल पहुंचे। माता रूपी सोरेन के निधन के बाद ननिहाल आने की पारंपरिक प्रक्रिया के तहत उनके मामा लखीराम किस्कू स्वयं मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और अपने भांजे को ससम्मान धातकीडीह गांव लेकर आए।
धातकीडीह स्थित ननिहाल में परिवार के सदस्यों ने संताली रीति-रिवाजों के अनुसार मुख्यमंत्री का स्वागत किया। परिजनों के बीच आत्मीय माहौल में पारिवारिक कार्यक्रम और पारंपरिक रस्में पूरी की गईं।
परिवार के साथ पारंपरिक व्यंजन ‘सोड़े’ का स्वाद
ननिहाल पहुंचने पर मुख्यमंत्री के मामा चारु चांद किस्कू, गुरुचरण किस्कू, दिलीप किस्कू, संतोष किस्कू, राजू किस्कू और चंद्रमोहन किस्कू सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उन्हें सम्मानपूर्वक घर में प्रवेश कराया गया।
इस दौरान हेमंत सोरेन ने अपने मामा और अन्य परिजनों के साथ बैठकर आदिवासी पारंपरिक व्यंजन ‘सोड़े’ का स्वाद लिया। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य लोगों के लिए मांस पीठा और चिकन खिचड़ी की व्यवस्था भी की गई थी।
क्या है संताली समाज की ‘मनतृप्ति’ यानी जीवी राडेज परंपरा?
संताली आदिवासी समाज में जन्म, विवाह और मृत्यु से जुड़े विभिन्न सामाजिक संस्कारों का विशेष महत्व है। इन्हीं परंपराओं में ‘मनतृप्ति’ या ‘जीवी राडेज’ भी शामिल है, जिसे पारिवारिक और भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, माता-पिता या परिवार के किसी वरिष्ठ सदस्य के निधन के बाद अंतिम संस्कार और संबंधित क्रिया-कर्म पूरे होने पर शोक संतप्त परिवार के सदस्यों को उनके ननिहाल आमंत्रित किया जाता है। ननिहाल पक्ष के लोग उन्हें सम्मानपूर्वक बुलाकर साथ समय बिताते हैं और दातुन-पानी सहित शोक निवारण से जुड़ी पारंपरिक विधियां पूरी करते हैं।
इस परंपरा का उद्देश्य शोक संतप्त परिजनों को पारिवारिक स्नेह, अपनापन और मानसिक संबल देना है। माता-पिता के नहीं रहने के बाद भी ननिहाल के साथ संबंधों और सांस्कृतिक निरंतरता को बनाए रखने का संदेश इसमें निहित है। मुख्यमंत्री का अपनी दिवंगत मां के निधन के बाद धातकीडीह पहुंचना इसी सामाजिक परंपरा का हिस्सा बताया गया है।
चांडिल डैम का भ्रमण, विधायक और अधिकारियों से मुलाकात
चांडिल पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चांडिल डैम स्थित निरीक्षण भवन (आईबी) में स्थानीय विधायक सविता महतो, जिले के उपायुक्त नितिश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार स्वर्गियारी तथा झामुमो के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।
कुछ देर विश्राम के बाद मुख्यमंत्री ने परिवार के सदस्यों के साथ चांडिल डैम का भ्रमण किया। इसके बाद उनका काफिला धातकीडीह (कंगलाटांड़) स्थित ननिहाल के लिए रवाना हुआ।
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था रही कड़ी
हेमंत सोरेन के आगमन को लेकर जिला प्रशासन सतर्क रहा। उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने स्वयं धातकीडीह गांव पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था तथा विधि-व्यवस्था का जायजा लिया। मुख्यमंत्री के मार्ग, गांव और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
इस दौरान पारिवारिक परंपराओं के निर्वहन के साथ मुख्यमंत्री का चांडिल दौरा स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में संपन्न हुआ।
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