Adityapur News: सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना में 6.87 लाख रुपये के बीमा क्लेम भुगतान विवाद को लेकर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक (CMD) समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मिथिला मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड की शिकायत पर कंपनी के CMD भूपेश सलिल राहुल, बिष्टुपुर शाखा के तत्कालीन प्रबंधक रविंद्र कुमार मुर्मू और सहायक प्रबंधक राम राय मुर्मू को नामजद किया गया है।
पुलिस ने 4 नवंबर 2026 को कांड संख्या 0319/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2) और 318(4) में मामला दर्ज किया है। मामले की जांच एएसआई बिभाष कुमार को सौंपी गई है।

Adityapur News: 6.87 लाख रुपये के क्लेम भुगतान पर विवाद
मिथिला मोटर्स के एचआर मैनेजर मदन कुमार के अनुसार, राजेश प्रसाद का दुर्घटनाग्रस्त वाहन संख्या JH05DV-3432 मरम्मत के लिए 17 अक्टूबर 2024 को कंपनी की वर्कशॉप में लाया गया था। वाहन यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से बीमित था।
शिकायत के मुताबिक, बीमा कंपनी के सर्वेयर द्वारा वाहन का निरीक्षण किए जाने के बाद मरम्मत का काम पूरा किया गया। इस पर कुल 7,88,228 रुपये खर्च हुए।
7.88 लाख रुपये की मरम्मत, 6.87 लाख का क्लेम स्वीकृत होने का दावा
शिकायतकर्ता का कहना है कि आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद बीमा कंपनी ने 6,87,659 रुपये का क्लेम स्वीकृत किया था। इसके आधार पर 3 दिसंबर 2024 को डिलीवरी ऑर्डर से संबंधित ई-मेल प्राप्त हुआ।
इसके बाद वाहन मालिक से शेष 1,00,569 रुपये जमा कराए गए और 4 दिसंबर 2024 को वाहन सुपुर्द कर दिया गया। मिथिला मोटर्स का आरोप है कि वाहन की मरम्मत और डिलीवरी के बावजूद स्वीकृत बीमा राशि का भुगतान नहीं किया गया।

कानूनी नोटिस के बाद भी भुगतान नहीं होने का आरोप
मिथिला मोटर्स के अनुसार, भुगतान के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन राशि नहीं मिली। इसके बाद 24 सितंबर 2026 को संबंधित अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं हुआ, जिसके बाद आदित्यपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
पुलिस जांच में स्पष्ट होगी अधिकारियों की भूमिका
पुलिस अब बीमा क्लेम की स्वीकृति, डिलीवरी ऑर्डर की शर्तों, भुगतान लंबित रहने के कारणों और नामजद अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी। अनुसंधान के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि मामला वित्तीय भुगतान विवाद तक सीमित है या शिकायत में लगाए गए आपराधिक आरोपों के समर्थन में साक्ष्य उपलब्ध हैं।
फिलहाल प्राथमिकी में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के हैं। इनकी सत्यता पुलिस अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। मामले में बीमा कंपनी के संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है।
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