ईचागढ़ के कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत सिरूम में गुरुवार को Rater Pari Jhankar सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहीद स्मारक समिति की ओर से आयोजित इस पारंपरिक बांग्ला सांस्कृतिक अनुष्ठान का उद्घाटन जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो, झारखंड आंदोलनकारी सुनील कुमार महतो और शहीद धनंजय महतो के पुत्र उपेंद्रनाथ महतो ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और दर्शक शामिल हुए।

Rater Pari Jhankar कार्यक्रम में पौराणिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
सिरूम में आयोजित कार्यक्रम में पौराणिक कथाओं और सामाजिक संदेशों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पेश की गईं। देर रात तक चले आयोजन में कलाकारों ने बंगाली गीतों, हास्य और व्यंग्य के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया।
पारंपरिक बांग्ला सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी देखने को मिली। आयोजकों की ओर से प्रस्तुतियों के माध्यम से लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक संदेशों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
Rater Pari Jhankar के उद्घाटन पर लोक संस्कृति के संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने कहा कि लोक संस्कृति और पारंपरिक अनुष्ठान समाज की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मधुश्री महतो ने ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, सांस्कृतिक आयोजनों से समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

शहीद दिवस पर आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ना
झारखंड आंदोलनकारी सुनील कुमार महतो ने कहा कि संस्कृति और परंपराएं समाज को एकजुट करती हैं। उन्होंने बताया कि शहीद दिवस पर इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को शहीदों के क्रांतिकारी योगदान से परिचित कराना है।
उन्होंने कहा कि पौराणिक कथाओं पर आधारित कार्यक्रम मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश भी देते हैं। सुनील कुमार महतो ने युवाओं से अपनी मातृभाषा, लोककला और सांस्कृतिक विरासत को समझने तथा उसे आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
शहीद स्मारक समिति के सदस्यों का योगदान
आयोजन को सफल बनाने में गंगाधर महतो, अशोक कुमार महतो, अवनी मंडल, पंचानन महतो, आशीष महतो, पप्पू प्रमाणिक और विभीषण महतो सहित शहीद स्मारक समिति सिरूम के सदस्यों का योगदान रहा। कार्यक्रम के जरिए क्षेत्र की पारंपरिक सांस्कृतिक गतिविधियों और विरासत को मंच प्रदान किया गया।
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