Bagbera water shortage – भीषण गर्मी के कारण बागबेड़ा, किताडीह और घाघीडीह क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत हो गई है। पानी का स्तर 500 से 700 फीट नीचे चला गया है, जिससे सरकारी और निजी बोरिंग ठप हो चुके हैं। क्षेत्र की जनता को पीने के पानी के लिए भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए बागबेड़ा महानगर विकास समिति के अध्यक्ष सुबोध झा के नेतृत्व में उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर को एक मांग पत्र सौंपा गया। इस पत्र में बागबेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में टैंकरों से पानी उपलब्ध कराने की अपील की गई है।

15 साल से अधूरी जलापूर्ति योजनाएं
बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी जलापूर्ति योजना और बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना को पूरा करने की मांग पिछले 15 वर्षों से की जा रही है। लेकिन कई बार आंदोलनों, प्रदर्शन और अदालती आदेशों के बावजूद ये योजनाएं अब तक धरातल पर पूरी नहीं उतर सकी हैं।
बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के लिए ₹237.21 करोड़ और हाउसिंग कॉलोनी के जलापूर्ति फिल्टर प्लांट के लिए ₹1.88 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया था। इसके बावजूद, इन योजनाओं का काम आज भी अधूरा है।
आंदोलन और अदालती कार्रवाई
बागबेड़ा महानगर विकास समिति ने अब तक 693 बार धरना प्रदर्शन, भूख हड़ताल, रेलवे पंप हाउस बंद, विधानसभा और लोकसभा का घेराव, और झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर इस मामले को उठाया है।
2023 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के तहत झारखंड सरकार को फंड उपलब्ध कराया गया। कोर्ट ने 15 महीने के भीतर जलापूर्ति योजनाओं को पूरा कर 26 जुलाई 2024 से पानी की आपूर्ति शुरू करने का आदेश दिया था। लेकिन वर्तमान स्थिति में यह योजना अधर में लटकी हुई है।

जनता की मांग – टैंकरों से पानी उपलब्ध कराया जाए
गर्मी के कारण पानी की स्थिति और भी विकराल हो गई है। इस समय बागबेड़ा, किताडीह और घाघीडीह के 1.20 लाख लोग पानी की भारी किल्लत झेल रहे हैं। मजबूरी में लोग ₹25 से ₹30 प्रति बोतल पानी खरीदकर पी रहे हैं।
बागबेड़ा महानगर विकास समिति ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक जलापूर्ति योजना पूरी नहीं हो जाती, तब तक आपदा प्रबंधन फंड से टैंकरों के माध्यम से पानी की व्यवस्था कराई जाए। इसके लिए टाटा स्टील अर्बन सर्विसेस, जुस्को, तारापुर कंपनी, यूसीएल कंपनी और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की मदद से प्रतिदिन 30 टैंकरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस विकट स्थिति से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। क्या बागबेड़ा की जनता को जल्द राहत मिलेगी, या फिर जल संकट और आंदोलन तेज होगा? जनता की निगाहें अब उपायुक्त के निर्णय पर टिकी हैं।
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