Jhansi Police Suspension : अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है। दरोगा भर्ती परीक्षा देने के लिए झूठ बोलकर छुट्टी लेने वाले 23 सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है और अन्य पुलिसकर्मियों को भी स्पष्ट संदेश दिया गया है कि नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई तय है।
क्या है पूरा मामला?
मामला हाल ही में आयोजित उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा 2026 से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इन सिपाहियों ने ड्यूटी से छुट्टी लेने के लिए बीमारी का झूठा बहाना बनाया और परीक्षा में शामिल होने चले गए।
परीक्षा समाप्त होने के बाद कुछ सिपाही वापस ड्यूटी पर भी लौट आए, लेकिन विभागीय स्तर पर हुई जांच में उनकी सच्चाई सामने आ गई। जांच में पाया गया कि कई पुलिसकर्मी बिना पूर्व अनुमति के लंबे समय तक अनुपस्थित रहे।
SSP ने क्यों लिया सख्त फैसला
झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बीबी जीटीएस मूर्ति ने 19 मार्च को इस कार्रवाई को मंजूरी दी थी, जो अब सार्वजनिक हुई है। SSP ने साफ किया कि यह कार्रवाई परीक्षा देने पर नहीं, बल्कि झूठ बोलकर छुट्टी लेने और बिना अनुमति अनुपस्थित रहने के कारण की गई है।
उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
30 दिन तक गायब रहे कई सिपाही
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ सिपाही 30 दिनों से अधिक समय तक बिना सूचना के ड्यूटी से अनुपस्थित रहे। यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इसे गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा गया है।
विभाग ने इस मामले में विस्तृत जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं और आगे और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
भर्ती परीक्षा का बड़ा पैमाना
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPBPB) द्वारा 14 और 15 मार्च को दरोगा के 4,543 पदों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। यह परीक्षा प्रदेश के सभी 75 जिलों में बनाए गए 1090 केंद्रों पर संपन्न हुई।
इस भर्ती के लिए कुल 15.75 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें 11.66 लाख पुरुष और 4.09 लाख महिला उम्मीदवार शामिल थीं। यह प्रदेश की सबसे बड़ी भर्तियों में से एक मानी जा रही है।
पूर्व DGP ने क्या कहा
पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन करना पुलिसकर्मियों का अधिकार है, लेकिन परीक्षा में शामिल होने के लिए विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी झूठे आधार पर छुट्टी लेता है, तो यह गंभीर अनुशासनहीनता है और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
विभाग के लिए सख्त संदेश
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस विभाग के भीतर एक सख्त संदेश दिया है कि नियमों से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी इस तरह की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।
झांसी का यह मामला केवल 23 सिपाहियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। पुलिस जैसी अनुशासित सेवा में नियमों का पालन सर्वोपरि है, और इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि कर्तव्य से समझौता करने वालों पर कड़ी कार्रवाई तय है।



