अव्यवस्था का आलम , स्थानीय लोगों के लिए बैठने तक का नहीं था व्यवस्था
NABARD Chairman Chandil Visit : राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अध्यक्ष शाजी के. वी ने शनिवार को सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड स्थित गोराडीह लैंप्स/एमपीसीएस का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने लैंप्स सदस्यों, किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों और किसानों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं व अनुभवों को जाना। साथ ही विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन करते हुए प्रतिभागियों से बातचीत की।

कार्यक्रम के दौरान गौरडीह एमपीसीएस के सदस्यों ने मोबाइल ऐप के माध्यम से लेन-देन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया, जिससे पैक्स के डिजिटलीकरण की प्रभावशीलता सामने आई। मौके पर नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय रांची की मुख्य महाप्रबंधक समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पद्मश्री चामी मुर्मू भी उपस्थित थी।
अपने संबोधन में नाबार्ड अध्यक्ष ने कहा कि ग्रामीण योजनाओं की सफलता का मूल आधार अंतिम छोर तक उनका प्रभावी क्रियान्वयन है। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड ,पैक्स के कंप्यूटरीकरण और एफपीओ को ग्रामीण परिवर्तन के तीन प्रमुख स्तंभ बताते हुए सहकारी संस्थाओं के माध्यम से ऋण वितरण को मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पैक्स का डिजिटलीकरण संस्थागत सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम है, जिससे पारदर्शिता, विश्वास और ऋण वितरण की गति में सुधार होगा। वहीं, एफपीओ को कृषि मूल्य श्रृंखला में अहम भूमिका निभाने वाला मंच बताते हुए उनके लिए ऋण उपलब्धता और व्यावसायिक मजबूती सुनिश्चित करने की बात कही। इस अवसर पर अध्यक्ष द्वारा पैक्स सदस्यता प्रमाण-पत्र, इ केसीसी प्रमाण-पत्र तथा एफपीओ को ईजीए स्वीकृति पत्र भी वितरित किए गए।

पद्मश्री चामी मुर्मू ने कहा कि सामुदायिक भागीदारी और महिलाओं की सक्रिय भूमिका से ही ग्रामीण विकास को स्थायित्व मिल सकता है। वहीं, नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक दीपमाला घोष ने कहा कि नाबार्ड सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़ करने, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने तथा तकनीक आधारित पहलों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कार्यक्रम का आयोजन नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक चंदना सुमन और पूर्वी सिंहभूम के डीडीएम जशिका बास्के के समन्वय में किया गया। नाबार्ड के अध्यक्ष के आगमन पर काफी संख्या में किसान और क्षेत्रीय लोग उपस्थित रहे, लेकिन लोगों के लिए अव्यवस्था का आलम रहा। स्थानीय व किसानों के लिए बैठने तक का व्यवस्था नहीं था। कुर्सियों पर नाबार्ड और लैम्पस से संबंधित लोग ही बैठे, ताकि क्षेत्र के स्थानीय लोग और किसान कमीयों को उजागर नहीं कर सके । वहीं समाजसेवी सह पूर्व पंसस गुरूचरण साव ने कहा कि नाबार्ड के अध्यक्ष हमारे यहां आना शौभाग्य की बात है। लेकिन सहकारिता आधारित विकास जन जागरूकता से ही संभव है। यहां लोगों को पता ही नहीं है नाबार्ड क्या है और सहकारिता समिति क्या है। जागरूकता का यहां घोर कमी है। ये जगह पुनर्वास स्थल है,जो डैम विस्थापित लोग रहते हैं, इन्हें भी सहकारिता समिति से जोड़कर स्वरोजगार का व्यवस्था करने की जरूरत है।



