ईचागढ़ के बासाहातु गांव में विधायक सविता महतो ने किया शुभारंभ, सरना स्थल पर पूजा-अर्चना के साथ संस्कृति की दिखी झलक
Sarhul Festival Basahatu : ईचागढ़ प्रखंड के बासाहातु गांव में शुक्रवार को प्रकृति और परंपरा का महापर्व सरहुल पूरे हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित भव्य सरहुल महोत्सव में ग्रामीणों की भारी भागीदारी देखने को मिली, जहां पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य-संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि एवं ईचागढ़ विधायक सविता महतो ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था और हमारी समृद्ध आदिवासी संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने ग्रामीणों से अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखने का आह्वान किया।
महोत्सव की शुरुआत गांव के पाहन कालीपोदो सिंह मुंडा द्वारा सरना स्थल पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ की गई। उन्होंने सखुआ (सरजम) के फूल अर्पित कर गांव की सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की। पूजा के बाद सखुआ फूलों का वितरण किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो उठा।
इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से आए छऊ नृत्य दलों की शानदार प्रस्तुति रही। कलाकारों ने अपने पारंपरिक मुखौटों और अद्भुत नृत्य शैली से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छऊ नृत्य की जीवंत प्रस्तुति को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे और देर शाम तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।
इसके अलावा पारंपरिक मुर्गा लड़ाई प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसने ग्रामीणों में विशेष उत्साह भर दिया। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और दर्शकों ने इसका भरपूर आनंद उठाया।
महोत्सव के सफल आयोजन में आयोजन समिति के सदस्यों—रामगोपाल सिंह मुंडा, रतनलाल सिंह मुंडा, विनोद सिंह मुंडा, ललीन सिंह मुंडा, राजेश सिंह मुंडा, गुरुदेव सिंह मुंडा, काशीनाथ सिंह मुंडा, मुकेश सिंह मुंडा, करण सिंह मुंडा एवं दीपक सिंह मुंडा सहित अन्य लोगों की अहम भूमिका रही।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं युवा पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर शामिल हुए और ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-झूमते नजर आए। पूरे आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सरहुल पर्व न केवल प्रकृति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का भी संदेश देता है।



