Chandil Irrigation News : चांडिल स्थित सुवर्णरेखा परियोजना के अंचल एवं प्रमंडल कार्यालय में बुधवार को ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के नेतृत्व में किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया।
रूदिया और भादुडीह पंचायत के किसानों ने सिंचाई के लिए देर से पानी उपलब्ध कराने का आरोप लगाते हुए अधीक्षक अभियंता के नाम मांग पत्र सौंपा। किसानों का दावा है कि सिंचाई में देरी के कारण उनकी 30 से 40 प्रतिशत धान की फसल बर्बाद हुई है।
समय पर पानी नहीं मिलने से फसल को नुकसान का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के जिला सचिव आशुदेव महतो ने किया। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसानों को दस दिन पहले सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करा दिया जाता, तो धान की फसल को हुए नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सकता था।
आशुदेव महतो ने सिंचाई विभाग पर किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेने और देर से पानी उपलब्ध कराने का आरोप लगाया। किसानों ने मांग की कि सिंचाई व्यवस्था में सुधार कर खेती के लिए समय पर पानी उपलब्ध कराया जाए।

अधीक्षक अभियंता की अनुपस्थिति में एसडीओ को सौंपा ज्ञापन
आशुदेव महतो के अनुसार, किसानों ने 13 अक्टूबर को लिखित सूचना देकर 14 अक्टूबर को अपनी समस्याएं रखने की जानकारी दी थी। हालांकि, प्रदर्शन के दिन अधीक्षक अभियंता कार्यालय में उपस्थित नहीं थे। इसके बाद उनकी अनुपस्थिति में एसडीओ कुमार हिमालय को मांग पत्र सौंपा गया।
किसानों की प्रमुख मांगें
धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- मुख्य नहर के 6.86 प्वाइंट पर तैनात गेटमैन को तत्काल हटाना।
- रूदिया पंचायत की शाखा नहर के क्षतिग्रस्त हिस्सों का सर्वे कराना।
- क्षतिग्रस्त नहर की पूर्ण मरम्मत कराना।
- शाखा नहर का सीमांकन कराना।
किसानों का कहना है कि नहर की मरम्मत और सिंचाई व्यवस्था में सुधार से उन्हें खेती के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत मिल सकती है।
धरना-प्रदर्शन में किसानों ने लगाए नारे
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने “चांडिल डैम में पानी रहते किसानों की फसल बर्बाद क्यों, सिंचाई विभाग जवाब दो” और “सिंचाई विभाग की मनमानी नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए।
इस धरना-प्रदर्शन में युधिष्ठिर प्रामाणिक, राजेश कुमार महतो, भुजंग मछुआ, धीरेन्द्र गौड़, त्रिलोचन महतो, दिलीप महतो, अर्जुन महतो और गुरवा मुर्मू सहित रूदिया एवं भादुडीह पंचायत के अनेक किसान शामिल हुए।
किसानों ने सिंचाई व्यवस्था में सुधार, क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत और उनकी समस्याओं के समाधान की मांग की। धान की फसल को हुए नुकसान का आंकड़ा किसानों की ओर से लगाया गया आरोप है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि और सिंचाई विभाग का पक्ष उपलब्ध होने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।




