Gamharia Police Case में सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना परिसर में महिला के साथ कथित दुष्कर्म के मामले में पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी ने बड़ी कार्रवाई की है। थाना प्रभारी संजय प्रसाद समेत छह पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, आरोपी वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की जांच के लिए एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है।
यह मामला उस समय सामने आया जब एक महिला अपने पति के साथ विवाद और कथित मारपीट के बाद मदद मांगने गम्हरिया थाना पहुंची थी। थाना परिसर में ही उसके साथ कथित घटना होने का आरोप लगा है।
Gamharia Police Case: पति से विवाद के बाद थाना पहुंची थी महिला
प्रारंभिक जांच के अनुसार, 29 अक्टूबर 2026 की रात महिला का अपने पति के साथ विवाद हुआ था। कथित मारपीट के बाद वह घर से निकलकर मदद की गुहार लगा रही थी। सूचना मिलने पर पुलिस गश्ती दल उसे सरकारी वाहन से गम्हरिया थाना लेकर पहुंचा। देर रात होने के कारण उसके ठहरने की व्यवस्था थाना परिसर में की गई थी।
जांच में सामने आया कि महिला को शुरुआत में पुलिस निरीक्षक के कार्यालय में रखा गया था। हालांकि, सुबह करीब 4:30 से 4:45 बजे के बीच वह निर्धारित कमरे में नहीं मिली। तलाश के दौरान उसकी चप्पल वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा के कमरे के बाहर दिखाई दी।
एक पुलिसकर्मी ने अपने बयान में दावा किया कि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और खुलने पर महिला तथा वायरलेस ऑपरेटर अंदर मौजूद थे। इसके बाद महिला ने अपने साथ गलत होने का आरोप लगाते हुए पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
आरोपी गिरफ्तार, फोरेंसिक जांच के लिए कपड़े जब्त
महिला की लिखित शिकायत के आधार पर गम्हरिया थाना कांड संख्या 86/26, दिनांक 31 अक्टूबर 2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया और आरोपी वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
पुलिस ने आरोपी के कमरे से उसके पहने हुए कपड़े भी जब्त किए हैं। इन कपड़ों को वैज्ञानिक जांच के लिए एफएसएल रांची भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। फोरेंसिक जांच से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की उम्मीद है।
Gamharia Police Case में थाना प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मी सस्पेंड
मामले की प्रारंभिक जांच में महिला की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद एसपी मनोज स्वर्गीयारी ने सख्त कदम उठाया। थाना प्रभारी संजय प्रसाद समेत कुल छह पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद थाने में महिला की सुरक्षा, पुलिसकर्मियों की जवाबदेही और ड्यूटी के दौरान निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, निलंबन की कार्रवाई और कथित अपराध के आरोपों की जांच अलग-अलग प्रक्रियाओं के तहत आगे बढ़ रही है।
गम्हरिया थाना कांड से संबंधित पिछली घटनाओं और पुलिस कार्रवाई की जानकारी के लिए गम्हरिया मामले में चार पुलिसकर्मियों के निलंबन की खबर और पुलिसकर्मी पर लगे आरोप से जुड़ी रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं।
एसडीपीओ के नेतृत्व में SIT गठित, हर पहलू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सरायकेला एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया है। SIT महिला को थाना लाए जाने से लेकर घटनाक्रम की पूरी समयावधि की जांच कर रही है।
जांच के दायरे में संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका, महिला की सुरक्षा व्यवस्था और उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य शामिल हैं। पुलिस टीम सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। अब जांच रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
जेएलकेएम नेताओं ने पीड़ित महिला के परिवार को दिया सहयोग
इस पूरे मामले में जेएलकेएम पार्टी के नेताओं की सक्रियता भी देखने को मिली। पार्टी के कई नेता महिला की मेडिकल जांच के दौरान सरायकेला सदर अस्पताल में देर रात तक उसके परिजनों के साथ मौजूद रहे। उन्होंने परिवार को सहयोग का भरोसा दिलाया और महिला को न्याय दिलाने की मांग उठाई।
मौके पर सरायकेला विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी प्रेम मार्डी, ईचागढ़ विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो, कोल्हान अध्यक्ष नवीन महतो, जिला अध्यक्ष दीपक महतो और अनीता महतो समेत पार्टी के कई नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद थे। मेडिकल जांच की प्रक्रिया के दौरान इन नेताओं ने परिजनों के साथ रहकर सहयोग किया।
जांच के निष्कर्ष पर टिकी सबकी निगाहें
फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है। थाना प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं और एसआईटी मामले की जांच में जुटी है। इस घटना ने पुलिस थानों में महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अब जांच के निष्कर्ष, फोरेंसिक रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है। आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।





