Kojagari Lakshmi Puja रविवार को सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में श्रद्धा और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर महिलाओं ने व्रत रखकर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा धन-धान्य से परिपूर्ण जीवन की कामना की। ईचागढ़, डुमरा, तामार, चांडिल, रघुनाथपुर और कुकड़ू सहित कई स्थानों पर पूजा का आयोजन किया गया।

Kojagari Lakshmi Puja में डुमरा मंदिर में उमड़ी भीड़
डुमरा स्थित दुर्गा मंदिर में मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालु कतार में लगकर पूजा करती नजर आईं। पूजा के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा।
पंडित नारायण चक्रवर्ती और उज्ज्वल चक्रवर्ती ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई। व्रती महिलाओं ने मां लक्ष्मी के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित की और कोजागरी लक्ष्मी व्रत कथा का श्रवण कर अपना व्रत पूरा किया।

Kojagari Lakshmi Puja की परंपरा और धार्मिक मान्यता
पंडित नारायण चक्रवर्ती के अनुसार, इस पूजा में खीर, नारियल और चूड़ा का प्रसाद विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागरण करने वाले भक्तों पर कृपा बरसाती हैं।
मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना और रात्रि जागरण करने से घर में सुख-समृद्धि तथा धन-धान्य का वास होता है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं। ये धार्मिक मान्यताएं परंपरा और आस्था पर आधारित हैं।

पूजा में ग्रामीणों और आयोजन समिति के सदस्यों की भागीदारी
पूजा के अवसर पर आयोजन समिति के दर्जनों सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। महिलाओं ने व्रत रखकर पूजा की और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की। विभिन्न स्थानों पर प्रतिमा स्थापित कर मां कोजागरी लक्ष्मी की आराधना की गई।
चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में आयोजित पूजा ने धार्मिक उत्साह और सामुदायिक भागीदारी का माहौल बनाया। क्षेत्र की अन्य खबरों के लिए ईचागढ़ में आदिम कुम्हार महासंघ के प्रतिनिधि सम्मेलन और झारखंड पंचायत चुनाव की तैयारियों से जुड़ी खबरें भी पढ़ सकते हैं।





