Kolkata DCP ED Arrest : प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बड़ी और अहम कार्रवाई की है। ईडी ने रंगदारी सिंडिकेट (Extortion Syndicate) चलाने के आरोप में कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (DCP) शांतनु सिन्हा बिस्वास को गिरफ्तार कर लिया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की इस गिरफ्तारी ने पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
गिरफ्तारी से पहले शांतनु सिन्हा बिस्वास से कोलकाता के साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स (CGO Complex) में ईडी के अधिकारियों ने घंटों लंबी पूछताछ की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के उस मामले में हुई है, जो कुख्यात सोना पप्पू उर्फ विश्वजीत पोद्दार (Sona Pappu alias Biswajit Poddar) से जुड़ा है।
आइए जानते हैं इस पूरे मामले की तफ्सील और कैसे ईडी के जाल में फंसे डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास:
सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार सुबह से ही ईडी अधिकारी डीसीपी शांतनु से पूछताछ कर रहे थे। शांतनु खुद पूछताछ के लिए एजेंसी के सामने पेश हुए थे। लगातार साढ़े 10 घंटे से अधिक समय तक चली मैराथन पूछताछ के बाद भी जब अधिकारियों को उनके जवाबों से संतुष्टि नहीं मिली और जांच में असहयोग का अंदेशा हुआ, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार किए गए पुलिस अधिकारी को आज ही अदालत में पेश किया जाएगा, जहां ईडी उनकी रिमांड की मांग कर सकती है, ताकि मामले की और गहराई से जांच की जा सके। शांतनु सिन्हा बिस्वास पहले कालीघाट पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज (Officer-in-Charge) भी रह चुके हैं। ईडी ने सोना पप्पू द्वारा चलाए जा रहे कथित आपराधिक सिंडिकेट के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए उन्हें कई बार समन भेजा था।
लेकिन, शांतनु लगातार इन समन को नजरअंदाज कर रहे थे और एजेंसी के सामने पेश होने से बच रहे थे। उनकी इस टालमटोल की वजह से जांच में बाधा आ रही थी, जिसके बाद ईडी ने शिकंजा और कसने का फैसला किया। डीसीपी के बार-बार पूछताछ से बचने और समन की अनदेखी करने पर ईडी ने कड़ा कदम उठाते हुए उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस (Lookout Notice) भी जारी कर दिया था। जांचकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना था कि वह किसी भी हाल में देश छोड़कर न भाग सकें। ईडी की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं को शांतनु बिस्वास से जुड़े कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन (Financial Transactions) के सुराग मिले हैं। इन लेन-देन के तार सीधे तौर पर सोना पप्पू और उसके करीबी सहयोगियों से जुड़े होने का दावा किया जा रहा है।
इसके अलावा, इसी मामले में गिरफ्तार किए गए बिजनेसमैन जॉय कामदार (Joy Kamdar) के पास से बरामद किए गए कई अहम दस्तावेजों में भी शांतनु बिस्वास का नाम और भूमिका सामने आई थी।
यह पहली बार नहीं है जब शांतनु ईडी के रडार पर आए हैं। इसी साल पिछले महीने, सोना पप्पू केस की तफ्तीश के दौरान ही ईडी ने शांतनु के फर्न रोड (Fern Road) स्थित आवास पर अचानक छापेमारी (Raids) भी की थी। बताया जा रहा है कि उस छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत जांच एजेंसी के हाथ लगे थे, जिन्होंने इस गिरफ्तारी की नींव रखी।
अब आगे क्या? एक डिप्टी कमिश्नर स्तर के अधिकारी की गिरफ्तारी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि अदालत में ईडी शांतनु बिस्वास के खिलाफ क्या-क्या सबूत पेश करती है और क्या इस रंगदारी सिंडिकेट में कुछ और बड़े सफेदपोशों या पुलिस अधिकारियों के नाम भी सामने आते हैं?
(इस बड़ी गिरफ्तारी पर आपकी क्या राय है? क्या पुलिस महकमे में इस तरह के भ्रष्टाचार से आम जनता का भरोसा टूटता है? अपने विचार नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर साझा करें और देश-दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए हमारे साथ बने रहें।)





