Bengali Language School Jharkhand : झारखंड के पोटका प्रखंड अंतर्गत पुतलूपुंग गांव में माताजी आश्रम द्वारा बांग्ला भाषा के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से 33वीं ‘अपूर पाठशाला’ का भव्य उद्घाटन किया गया। रविवार सुबह 9:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय शिक्षाविदों, समाजसेवियों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी एवं साहित्यकार सुनील कुमार दे, शिक्षाविद आशुतोष मण्डल तथा लखन चंद्र मण्डल ने विधिवत दीप प्रज्वलित कर एवं फीता काटकर किया। इसके पश्चात बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना एवं गीत प्रस्तुत कर माहौल को सांस्कृतिक रंग दिया गया।
बांग्ला भाषा को बचाने की सराहनीय पहल
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षक हरेमोहन मण्डल ने अतिथियों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए माताजी आश्रम के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि बांग्ला भाषा को बचाने के लिए यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है और समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करती है।
उन्होंने बताया कि साहित्यकार सह समाजसेवी सुनील कुमार दे के नेतृत्व में माताजी आश्रम लगातार विभिन्न गांवों में अपूर पाठशालाएं खोलकर मातृभाषा के संरक्षण का कार्य कर रहा है। अब तक 33 पाठशालाओं की स्थापना इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

“मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं” – आशुतोष मण्डल
शिक्षाविद आशुतोष मण्डल ने अपने संबोधन में कहा कि मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं होता। उन्होंने बांग्ला भाषी बच्चों से आग्रह किया कि वे गर्व के साथ अपनी मातृभाषा को सीखें और उसका सम्मान करें।
कार्यक्रम में देव रंजन मण्डल, मृणाल पाल, लखन चंद्र मण्डल और जगत मण्डल ने भी बच्चों को अपनी भाषा से जुड़ने और उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
बच्चों को निःशुल्क शिक्षा सामग्री वितरित
उद्घाटन के बाद बच्चों को बांग्ला वर्णमाला की प्रारंभिक शिक्षा दी गई। साथ ही उन्हें कॉपी और कलम निःशुल्क प्रदान किए गए। हरेमोहन मण्डल ने पहला बांग्ला क्लास लेकर बच्चों को भाषा से परिचित कराया।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक रविवार को इस पाठशाला में बच्चों को निःशुल्क बांग्ला भाषा सिखाई जाएगी। इस कार्य में देव रंजन मण्डल भी सहयोग करेंगे।
20 बच्चों का हुआ नामांकन
इस अवसर पर कुल 20 बच्चों का नामांकन किया गया, जो अब नियमित रूप से इस पाठशाला में शिक्षा प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम का संचालन सुनील कुमार दे ने किया।
इनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम में सुनील कुमार दे, आशुतोष मण्डल, हरेमोहन मण्डल, लखन चंद्र मण्डल, मृणाल पाल, अमल बिस्वास, जगत मण्डल, बसंत मण्डल, शिपुन मण्डल, रुम्पा मण्डल, सुदेशना मण्डल, चंदना मण्डल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं स्कूली बच्चे उपस्थित थे।
माताजी आश्रम द्वारा शुरू की गई यह पहल न केवल बांग्ला भाषा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का भी एक सशक्त माध्यम बन रही है। लगातार बढ़ती अपूर पाठशालाएं इस बात का प्रमाण हैं कि समाज में मातृभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।



