Teacher Deputation Scam : झारखंड में सरकारी स्कूलों की बदहाली और शिक्षा व्यवस्था की लचर स्थिति किसी से छिपी नहीं है। एक तरफ सरकार “सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा” का नारा देती है, तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत ओड़िया पंचायत के मध्य विद्यालय दुलमी (Middle School Dulmi) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस स्कूल में कुल 5 शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन वर्तमान में स्थिति यह है कि इनमें से दो शिक्षक सालों से डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर दूसरे स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं और एक शिक्षक अनफिट बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे पढ़ाई कैसे करेंगे?
आइए जानते हैं इस पूरे मामले की सच्चाई और कैसे डेपुटेशन के नियमों को ताक पर रखा जा रहा है।
मध्य विद्यालय दुलमी में कागजों पर तो 5 शिक्षकों की तैनाती है, जो यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए पर्याप्त मानी जा सकती है। लेकिन वास्तविकता इसके उलट है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार:
- दो शिक्षक डेपुटेशन पर: इनमें से दो शिक्षक अन्य विद्यालयों में प्रतिनियुक्त हैं।
- एक शिक्षक अनफिट: एक अन्य शिक्षक स्वास्थ्य कारणों या अन्य वजहों से अनफिट बताए जा रहे हैं।
इस तरह, 5 शिक्षकों वाले इस स्कूल में पढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ 2 शिक्षकों के कंधों पर आ गई है। अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि ऐसे हालात में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।
सालों से जमे हैं डेपुटेशन पर, नियम केवल 3 महीने का
शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी शिक्षक का डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 3 महीने के लिए ही किया जा सकता है। लेकिन दुलमी स्कूल के मामले में यह नियम मजाक बनकर रह गया है।
ग्रामीणों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन दोनों शिक्षकों के डेपुटेशन का मामला बेहद चौंकाने वाला है:
मामला 1: शिक्षक पप्पू रजक (वर्ष 2021 से गायब)
शिक्षक पप्पू रजक जी का डेपुटेशन वर्ष 2021 में किसी अन्य विद्यालय में किया गया था। नियमतः उन्हें 3 महीने बाद वापस अपने मूल विद्यालय (मध्य विद्यालय दुलमी) लौट आना चाहिए था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 3 साल बीत जाने के बाद भी वे आज तक दुलमी स्कूल में वापस नहीं लौटे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उन्होंने दुलमी स्कूल में अपना योगदान ही नहीं दिया है, तो उनका वेतन किस स्कूल से और कैसे आहरित (Draw) किया जा रहा है?
मामला 2: शिक्षक दिनेश नाग (वर्ष 2024 से डेपुटेशन पर)
इसी तरह, एक अन्य शिक्षक दिनेश नाग का डेपुटेशन वर्ष 2024 की शुरुआत में हुआ था। महीनों बीत जाने के बाद भी उन्होंने अब तक दुलमी मध्य विद्यालय में अपना योगदान नहीं दिया है। दुलमी मध्य विद्यालय में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे ग्रामीण और गरीब परिवारों से आते हैं, जो निजी स्कूलों का भारी-भरकम खर्च नहीं उठा सकते। ऐसे में शिक्षकों की अनुपस्थिति से सीधा असर इन बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है।
ओड़िया पंचायत के ग्रामीणों में शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि:
“जब नियम 3 महीने के डेपुटेशन का है, तो ये शिक्षक सालों तक दूसरे स्कूलों में कैसे जमे हुए हैं? क्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना ऐसा संभव है? हमारे बच्चों का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है और कोई सुध लेने वाला नहीं है।” – समाजसेवी गौरांगों दत्ता
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
यह पूरा मामला सीधे तौर पर स्थानीय शिक्षा विभाग के अधिकारियों (BEO, DEO) की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है।
- क्या अधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि एक ही स्कूल से दो शिक्षक सालों से गायब हैं?
- पप्पू रजक जी का वेतन किस आधार पर जारी किया जा रहा है?
- डेपुटेशन के 3 महीने के नियम का पालन क्यों नहीं सुनिश्चित किया जा रहा है?
ग्रामीणों और पंचायत के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस मामले की तुरंत जांच की जाए। सालों से डेपुटेशन पर गए शिक्षकों का डेपुटेशन तुरंत रद्द कर उन्हें वापस मध्य विद्यालय दुलमी भेजा जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके। यदि जल्द ही इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।






