Dulmi School Teacher Shortage : झारखंड की शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ करने और सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय दुलमी में शिक्षकों की भारी कमी और पठन-पाठन में आ रही बाधाओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता रोहित दे ने ईचागढ़ की लोकप्रिय विधायक सबिता महतो से उनके जमशेदपुर के उलियान स्थित आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने विद्यालय की बदहाल शैक्षणिक स्थिति से विधायक को विस्तार से अवगत कराया।
दुलमी स्कूल में पठन-पाठन ठप होने की कगार पर, बच्चों का भविष्य अधर में
मुलाकात के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता रोहित दे ने विधायक सबिता महतो को बताया कि मध्य विद्यालय दुलमी में शिक्षकों की भारी किल्लत है। इस कमी के कारण विद्यालय के बच्चों की नियमित पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब बच्चे, जो पूरी तरह से सरकारी स्कूल की शिक्षा पर निर्भर हैं, उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
रोहित दे ने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि विद्यालय में डेप्युटेशन (प्रतिनियुक्ति) पर कार्यरत दो शिक्षकों के कारण भी व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है। उन्होंने मांग की कि इस अव्यवस्था को तुरंत सुधारा जाए और स्कूल में स्थायी व पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों को एक बेहतर और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
सामाजिक कार्यकर्ता की बातों को ईचागढ़ विधायक सबिता महतो ने बेहद संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ सुना। मामले पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए विधायक ने आश्वासन दिया कि वे इस संबंध में जिला शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से बात कर आवश्यक कदम उठाएंगी।
विधायक सबिता महतो ने कहा, “ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाना हमारी प्राथमिकता है। ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हम लगातार प्रयासरत हैं। दुलमी मध्य विद्यालय में शिक्षकों की कमी की समस्या का समाधान जल्द से जल्द किया जाएगा ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई बाधित न हो।”
शिक्षकों की कमी के मुद्दे के साथ-साथ इस शिष्टाचार मुलाकात के दौरान ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा के समग्र विकास, नए संसाधनों की उपलब्धता और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। स्थानीय बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों ने रोहित दे के इस प्रयास की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि विधायक के हस्तक्षेप के बाद जल्द ही विद्यालय की स्थिति में सुधार होगा।





