Chaibasa Child Marriage Awareness : झारखंड में सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय पहल के तहत आज चाईबासा स्थित संत जेवियर्स उच्च विद्यालय (+2) लुपुंगुटू में लीगल लिट्रेसी क्लब के अंतर्गत निबंध एवं चित्रांकन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, चाईबासा द्वारा आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार के अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर एवं सचिव रवि चौधरी के मार्गदर्शन में किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य विषय बाल विवाह और गरीबी उन्मूलन योजनाएं रहा, जिसमें विद्यालय के कक्षा 11 (कॉमर्स एवं साइंस) के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

प्रतियोगिता के माध्यम से सामाजिक जागरूकता पर जोर
इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच कानूनी जागरूकता फैलाना और उन्हें सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाना था। छात्रों ने निबंध और चित्रों के माध्यम से बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुरीति के खिलाफ अपने विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में मौजूद अधिकार मित्र सूरज कुमार ठाकुर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि
“लड़कों की 21 वर्ष से कम और लड़कियों की 18 वर्ष से कम उम्र में शादी करना या करवाना कानूनन अपराध है, जिसे बाल विवाह कहा जाता है।”
उन्होंने बच्चों को इसके दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और समाज में इसके खिलाफ जागरूकता फैलाने की अपील की।
छात्रों ने रचनात्मकता से दिया मजबूत संदेश
प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों ने अपने लेखन और चित्रों के जरिए बाल विवाह के दुष्परिणाम, शिक्षा का महत्व और सरकारी योजनाओं की जानकारी को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। छात्रों के उत्साह और सहभागिता ने कार्यक्रम को सफल और सार्थक बना दिया।
इस पहल के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि युवा पीढ़ी ही समाज में बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है और वे अपने गांव एवं शहरी क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
शिक्षकों और सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं तथा अधिकार मित्र सूरज कुमार ठाकुर एवं हेमराज निषाद का विशेष योगदान रहा। सभी ने मिलकर इस आयोजन को एक सफल सामाजिक अभियान का रूप दिया।
इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान और रचनात्मकता को बढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें एक जागरूक नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित भी करते हैं। लीगल लिट्रेसी क्लब जैसी पहलें समाज में फैली कुरीतियों को खत्म करने और कानून की समझ विकसित करने में बेहद कारगर साबित हो रही हैं।






