चाईबासा जिला विधिक सेवा प्राधिकार की पहल—संविधान, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर दिया गया विशेष जोर
चाईबासा (झारखंड) : झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, चाईबासा द्वारा आज कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, खुंटपानी में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर एक विशेष विधिक जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर एवं प्राधिकार सचिव रवि चौधरी के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं द्वारा नशा मुक्ति, बाल विवाह और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्राओं ने समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने का सराहनीय प्रयास किया।

सामाजिक न्याय और संविधान पर विशेष फोकस
अधिकार मित्र सूरज कुमार ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहेब के संवैधानिक आदर्श आज भी समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकार का उद्देश्य हर व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने आगे कहा कि—
- सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के लिए कानूनी सहायता बेहद जरूरी है
- शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही समाज की बुराइयों को समाप्त किया जा सकता है
- संविधान के प्रति निष्ठा और उसके मूल सिद्धांतों की जानकारी हर नागरिक को होनी चाहिए
बाल विवाह और महिला सशक्तिकरण पर जोर
अधिकार मित्र अल्कामा रूही ने छात्राओं को बाल विवाह अधिनियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कम उम्र में विवाह के दुष्प्रभावों को बताते हुए लड़कियों को शिक्षा पर ध्यान देने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, इसलिए जरूरी है कि बालिकाएं अपने अधिकारों को समझें और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा को प्राथमिकता दें।

प्राचार्य का संदेश—“समानता, शिक्षा और बंधुत्व”
विद्यालय की प्राचार्य कुमारी ममता ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन हर व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने छात्राओं को संविधान के मूलभूत सिद्धांतों—समानता, शिक्षा और बंधुत्व—को समझने और अपनाने का संदेश दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम है और हर छात्रा को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।
बड़ी संख्या में हुई भागीदारी
इस जागरूकता कार्यक्रम में विद्यालय की बड़ी संख्या में छात्राएं, प्राचार्य कुमारी ममता, अधिकार मित्र सूरज कुमार ठाकुर, अल्कामा रूही तथा स्थानीय महिला समूहों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाया और सामाजिक जागरूकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित यह विधिक जागरूकता अभियान न केवल छात्राओं के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि समाज में नशा मुक्ति, बाल विवाह रोकथाम और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ।





