Ichagarh News : झारखंड में बंगाल एकेडमी की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। शुक्रवार को झारखंड बांग्ला भाषी उन्नयन समिति की ओर से कुकड़ू प्रखंड विकास पदाधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया । ज्ञापन में मांग किया गया है कि झारखंड में शीघ्र “बांग्ला अकादमी” का गठन किया जाय ।
विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा
ज्ञापन में बताया गया है कि झारखंड विधानसभा के हालिया बजट सत्र के दौरान निरसा (धनबाद) के विधायक Arup Chatterjee ने 9 मार्च 2026 और 17 मार्च 2026 को सदन में “Jharkhand Bangla Academy Formation” का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इस दौरान उन्होंने राज्य में बांग्ला भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए एक संस्थागत ढांचा बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
16 जिलों में बांग्लाभाषियों की मजबूत उपस्थिति
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि झारखंड के 24 जिलों में से लगभग 16 जिलों में बांग्लाभाषी आबादी बड़ी संख्या में निवास करती है। इन क्षेत्रों में बांग्ला भाषा जनसंपर्क की प्रमुख भाषा के रूप में उपयोग की जाती है। इसके बावजूद, राज्य गठन के 25 वर्षों बाद भी बांग्ला भाषा के विकास और संरक्षण के लिए कोई ठोस सरकारी संस्था स्थापित नहीं की गई है।
शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर
बांग्ला अकादमी के अभाव का सबसे अधिक असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा है। ज्ञापन में बताया गया है कि:
- बांग्ला माध्यम विद्यालयों में पठन-पाठन लगभग ठप हो चुका है
- बांग्ला भाषा की पाठ्यपुस्तकों की भारी कमी है
- योग्य बांग्ला शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। संयुक्त बिहार में स्थापित बांग्ला माध्यम के विद्यालयो में भी बच्चे बांग्ला माध्यम की पढ़ाई से वंचित हो गया है।
इन समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में बांग्लाभाषी छात्र स्कूल छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे राज्य में ड्रॉपआउट रेट भी प्रभावित हो रहा है।
मातृभाषा में शिक्षा का अभाव बना बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि मातृभाषा में शिक्षा न मिलने के कारण बच्चों की सीखने की क्षमता प्रभावित होती है। झारखंड के बांग्लाभाषी छात्रों के साथ भी यही स्थिति बन रही है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में बांग्ला भाषा और संस्कृति को गंभीर नुकसान हो सकता है।
संवैधानिक और सांस्कृतिक महत्व
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि बांग्ला भाषा भारतीय संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल एक समृद्ध भाषा है। हाल ही में वर्ष 2024 में भारत सरकार द्वारा इसे “शास्त्रीय भाषा” का दर्जा भी प्रदान किया गया है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता और बढ़ गई है।
बिहार में पहले से मौजूद है बांग्ला अकादमी
ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि अविभाजित बिहार में वर्ष 1986 में “बिहार बांग्ला अकादमी” का गठन किया गया था, जो आज भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। उस समय दक्षिण बिहार (वर्तमान झारखंड) के बांग्लाभाषी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई थी। ऐसे में झारखंड में अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम न उठाया जाना सवाल खड़े करता है।
सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग
ज्ञापन के अंत में सरकार से मांग की गई है कि झारखंड के लगभग 42% बांग्लाभाषी नागरिकों की भावनाओं और शैक्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए “Jharkhand Bangla Academy Formation” की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जाए।
क्या कहता है यह मुद्दा? (विश्लेषण)
यह मामला केवल भाषा का नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक पहचान से जुड़ा हुआ है। अगर सरकार इस दिशा में कदम उठाती है, तो इससे:
- बांग्ला भाषा और साहित्य को बढ़ावा मिलेगा
- छात्रों को मातृभाषा में शिक्षा का अवसर मिलेगा
- सांस्कृतिक विविधता को मजबूती मिलेगी
झारखंड में “Bangla Academy Formation” की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है। विधानसभा से लेकर आम जनता तक इस मुद्दे को लगातार उठाया जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार इस पर कब और क्या निर्णय लेती है।





