Jamshedpur Bomb News : पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत पानीपोड़ा–नागुड़साईं इलाके में एक बार फिर द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय का जिंदा बम मिलने से इलाके में दहशत का माहौल है। बीते एक महीने के भीतर यह तीसरी घटना है, जिसने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
नदी में मछली पकड़ने गए ग्रामीणों को मिला बम
जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात गांव के कुछ लोग स्वर्णरेखा नदी में मछली पकड़ने गए थे। भीषण गर्मी के कारण नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे नदी की रेतीली सतह उभरकर सामने आ गई है। इसी दौरान ग्रामीणों की नजर एक बड़े और भारी लोहे जैसी वस्तु पर पड़ी।
शुरुआत में इसे सामान्य धातु का टुकड़ा समझा गया, लेकिन पास जाकर देखने पर पता चला कि वह एक शक्तिशाली जिंदा बम है। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और पुलिस को दी।
लगातार मिल रहे बम, बढ़ी चिंता
पिछले एक महीने में इस क्षेत्र से तीसरी बार युद्धकालीन विस्फोटक बरामद होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी इसी इलाके में दो बार ऐसे बम मिल चुके हैं, जिन्हें बम निरोधक दस्ते द्वारा निष्क्रिय किया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए किया जाता था, जिसके कारण यहां इस तरह के विस्फोटक दबे हो सकते हैं।
प्रशासन अलर्ट, जांच की मांग तेज
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया। बम निरोधक दस्ते को भी सूचित कर दिया गया है, ताकि बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया जा सके।
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि पूरे नदी तटीय क्षेत्र और आसपास के गांवों में व्यापक जांच अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
ग्रामीणों में डर का माहौल
लगातार हो रही इस तरह की घटनाओं से ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि नदी में मछली पकड़ना या अन्य कार्य करना अब जोखिम भरा हो गया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने युद्धकालीन बम वर्षों तक जमीन या पानी में दबे रहने के बावजूद सक्रिय रह सकते हैं। ऐसे में इनके संपर्क में आना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।





