Chaibasa News (पश्चिमी सिंहभूम) — झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां चेकडैम में डूबने से 12 वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है, वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
क्या है पूरा मामला?
यह हृदयविदारक घटना चाईबासा के जराईकेला थाना क्षेत्र अंतर्गत रवगंदा गांव की है। मृत बच्ची की पहचान रुपनी मिंज (12 वर्ष) के रूप में हुई है, जो गांव निवासी सोमरा मिंज की पुत्री थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम करीब 5 बजे रुपनी गांव के पास स्थित चेकडैम में नहाने के लिए गई थी। रोज की तरह यह एक सामान्य दिन था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह दिन इस परिवार के लिए इतना दुखद साबित होगा।
देर रात तक घर नहीं लौटी, बढ़ी चिंता
जब शाम ढलने के बाद भी रुपनी घर वापस नहीं लौटी, तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। उन्होंने आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों के यहां काफी खोजबीन की, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला।
पूरी रात परिवार और ग्रामीण बेचैनी में रहे, हर किसी को अनहोनी की आशंका सता रही थी।
सुबह चेकडैम में मिला शव, मचा हड़कंप
शुक्रवार सुबह जब कुछ ग्रामीण चेकडैम में नहाने पहुंचे, तो उन्होंने किनारे पर बच्ची के कपड़े पड़े देखे। इसके बाद शक होने पर जब पानी में झांका गया, तो रुपनी का शव पानी में उतराता हुआ दिखाई दिया।
यह दृश्य देखकर मौके पर हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने तुरंत शोर मचाकर अन्य लोगों को बुलाया। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन घटनास्थल पर पहुंच गए।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही जराईकेला थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से शव को पानी से बाहर निकलवाया।
इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, गांव में पसरा मातम
रुपनी की असामयिक मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव में भी गहरा शोक व्याप्त है। हर किसी की आंखें नम हैं और लोग इस घटना से स्तब्ध हैं।
बड़ा सवाल: सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं?
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में चेकडैम और जलाशयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- क्या वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे?
- क्या बच्चों के लिए चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग की व्यवस्था थी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाते, तो शायद इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी।
यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है। जलाशयों के आसपास सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।





